➤ फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस मामले में हाईकोर्ट सख्त, एसपी ऊना को बनाया प्रतिवादी
➤ कोर्ट ने कहा- संज्ञेय अपराध बनता है तो तुरंत दर्ज हो एफआईआर
➤ एक ही आधार नंबर पर दो लाइसेंस समेत कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां उजागर
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में कथित तौर पर जारी किए गए फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ऊना के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ कहा है कि यदि जांच में कोई संज्ञेय अपराध बनता है तो पुलिस बिना देरी किए तुरंत एफआईआर दर्ज करे।
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन को अदालत की अंतिम कार्यवाही का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर मामले की गहन जांच तुरंत शुरू की जाए। कोर्ट ने सरकार और पुलिस प्रशासन को अगली सुनवाई तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित की गई है।
जनहित याचिका में पेश किए गए तथ्यों ने अदालत को भी हैरान कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में बड़े स्तर पर दस्तावेजी हेरफेर और तकनीकी अनियमितताएं हुई हैं। कई मामलों में एक ही आधार कार्ड नंबर पर दो अलग-अलग ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिए गए। इतना ही नहीं, कई ऐसे लाइसेंस भी सामने आए हैं जिनके लाभार्थी संबंधित राज्यों के निवासी तक नहीं पाए गए।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने एक ऐसा मामला भी आया जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस पर निवासी राज्य मध्य प्रदेश दर्शाया गया, लेकिन लाइसेंस जारी करने वाली अथॉरिटी डीटीओ ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) दर्ज है। वहीं लाइसेंस नंबर की शुरुआत उत्तर प्रदेश से हो रही है, जबकि संबंधित व्यक्ति ऊना का निवासी बताया गया है।
एक अन्य मामले में लाइसेंस को बिहार सरकार की ओर से जारी दिखाया गया, लेकिन उस पर आरटीओ सुल्तानपुर अंकित था और लाइसेंस नंबर महाराष्ट्र राज्य से संबंधित पाया गया। अदालत ने इन विसंगतियों को बेहद गंभीर माना है।
सबसे चौंकाने वाला मामला ऊना निवासी मनजीत सिंह और हरदीप कुमार से जुड़ा सामने आया, जिनके आधार कार्ड नंबर एक समान पाए गए। अदालत ने माना कि इस तरह की अनियमितताएं न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती हैं, बल्कि इससे बड़े स्तर के फर्जीवाड़े और संगठित नेटवर्क की आशंका भी पैदा होती है।
हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।



